आज से लगभग सौ वर्ष पूर्व करौली का रोधई गांव - करौली के क्रांतिकारी कुँवर मदन सिंह जी की कलम से।

आज से लगभग सौ वर्ष पूर्व करौली का रोधई गांव - करौली के क्रांतिकारी कुँवर मदन सिंह जी की कलम से।


आज से लगभग सौ वर्ष पूर्व करौली का रोधई गांव जिसमे था उस समय जलसंकट  - करौली के क्रांतिकारी कुँवर मदन सिंह जी की कलम से।


रोधई ऊंची जगह नालो के मुहानों पर बसा हुआ है इसके पश्चिम में विंध्याचल की पर्वतमाला है तो पूर्व में बड़े बड़े नालों की श्रृंगार से सजी हुई चंबल नदी अठखेलियां करती दौड़ रही है। चंबल रोधई से एक मील दूर है, यहां का मार्ग खराब है, यहां पर कार्तिक( खरीफ) कृषि होती है। यह ग्राम पूर्व में 400 घरों से सुसज्जित था, किंतु 'दिनन के फेर से सुमेर होत माटी के'आज के दिनो में इसमें 250 घर होंगे। यह ग्राम में जल संकट में है,यानी जल के लिए हाहाकार है लगभग बुरे मार्गों को तय करके 1 मील से जल लाना पड़ता है।

किसी ग्राम में जब माता-पिता की लड़की से नाराजगी होती है तो कहते थे तेरा रोधई विवाह करेंगे जो पानी भरते भरते मर जाएगी । कहते हृदय फटता है कि यहां के लोगो को एक कुशल जल प्रबन्ध की आवश्कता है, और उसका प्रबंधन के लिए श्री महाराज साहब दीवान साहब का ध्यान इधर आकर्षित करता हूं कि रोधई में राज्य की ओर से कूप खुदवाया जाए और दर्रा को बांध दिया जाए तो भारी सरोवर हो सकता है इस ग्राम में राज्य की ओर से एक गढ़ी बनी हुई है, जबकि यह गढ़ी जीर्णशीर्ण हो चुकी है, बहुत सी जगह गिर चुकी है,यहां पर राज्य की कुछ सिपाही रहते हैं जिनका वेतन दो से ढाई रूपया मासिक बतलाया गया है, श्री महाराज को इन राजपूतों का वेतन बढ़ाना चाहिए। 


इस गांव में पाठशाला खोली थी जो अब बाल्यावस्था में ही मृत्यु शैया पर पड़ी मृत्यु की बाट जो रही है, इसके अध्यापक जेष्ठ माह में मुझसे प्रेम आश्रम में मिले उन्होंने मुझे इसकी करुणाजनक दशा  बताते हुए रोधाई आने का निमंत्रण दिया, में इसी पाठशाला की वर्तमान दशा ठीक करने यहां आया हूं ।

अपने कार्य से निवृत्त होकर पाठशाला के लिए ग्रामीण जनों को एकत्रित करने के लिए बुलावा भेजा गया बहुत कम लोग आए यहां के लोगों के ह्रदय में ऐसा भाव है कि जिसके पुत्र हैं, वहीं कुछ पाठशाला  को दे, यहां के लोग विवेकशून्य है,उन्हें शिक्षित होना पसंद नहीं, आखिर यही हुआ कि मैंने बालकों के पिता से विशेष अनुरोध कर इस पाठशाला को चलाने को कहा कुछ ने अनुरोध  स्वीकार किया देखना हैं पाठशाला जीवित रहती है या अकाल मृत्यु की ग्रास हो जाती है यदि पाठशाला टूटी तो रोधई वालो को जान लेना चाहिए कि उनके ऊपर यह दोष लगेगा कि वे बालको शत्रु है, यदि ग्रामीण लोगों से वार्षिक रूप से सिर्फ एक रुपया भी देवे तो भी में पाठशाला चला सकता हु।

ग्रामीण लोगो से तीन घंटे सिरपची करने के बाद के भोजन करने की ठानी , इतने में 2 मील की दूरी पर से दो आदमी आधा मन दूध लेकर आए और मुझे बगुर का हाकिम समझ कर उसे मेरे सामने रख दिया मैं बोला आप लोग दूध कहां से लाए हो और मेरे पास क्यों लाए, तो किसानों ने बताया कि बगुर के हाकिम (महकमा जगत) के आते हैं उन्हें बेगार (बिना मूल्य) मैं किसानों से लेकर कुनतावारियाने घाटीऊपर भेजा जाता है । 

मैंने कहा कि में बागुर का हाकिम नहीं  इस दूध को शीघ्र यहां से ले जाओ मेरा हृदय इसे देखकर धड़कता है, दोनों किसान बोले आप जहां चाहे वहां रख दें, फिर मैंने उन्हें समझाया कि में कोई राजकीय कार्य के लिये नही अपितु पाठशाला के लिये आया हु इस बेगार के दूध से मेरा कोई वास्ता नही है अपितु में तो खुद इस बेगरप्रथा का विरोधी हु।


मैंने कहा की जो बागुर हाकिम होंगे उनसे पूछो मेरा और किसानों का वार्तालाप समाप्त हुआ अभी एक घंटा ही नहीं हुआ कि 5 सिपाही आए उनमें से एक सिपाही को आवाज दी पर वह मुझे वहाँ देखकर झिझक गया बोला कुँवर साहब आप कैसे पधारे मैंने थोड़ी उससे बात की फिर उन सिपाहियों को  इस बेगार  के दूध के लिये बहुत समझाया पर शायद सिपाही भी चाहते थे कि यह बला यहां से टल जाए तो हम किसानों पर हाथ साफ कर ले  और अपनी उल्लू सीधा करें।

 मेरा भी समय हो चुका था और मैं अपने साथी सूर्य की गर्म किरणों में चल दिए मार्ग में कीचड़ भी बहुत था कई बार काटे भी लग जाते पर मेरे साथी मदनमोहन के पास सुई थी, उससे बार-बार निकालते हुए चलते इस प्रकार हम लोग दर्रा ओर बीहड़ को समाप्त करते हुए आगे बढ़े हाकिम बगुर मार्ग में उधर से आते मील हाकिम बगुर यहाँ सूबेदार को कहते है।

 

views: 355


DIRECTORY

Schools Colleges Coaching Centers Hospitals & Doctors Medical Stores District Administration District Police Administration Electronics Stores Mobile Shops Hotels & Restaurants Marriege Palace E- mitra Centers General Store Shoe Slippers Store Firm & Company Bank in Karauli

Karaulians

Karaulians का मुख्य उद्देश्य राजस्थान के इतिहास एवं ऐसा इतिहास जो किन्ही परिस्थितियों के कारण इतिहास के पन्नो में संकुचित सा होकर रह गया है, को डिजिटल माध्यम से जन जन तक पहुंचाने का है | राजस्थान, जो की शुरू से ही पर्यटन स्थलो से परिपूर्ण रहा है परन्तु वहाँ के कुछ छुपे हुए पर्यटन स्थल जो आकर्षक और अदभुत होने के बाद भी सैलानियों की नजरों से अभी भी दूर है, उन्हें भारत के पर्यटन स्थलों की सूची की पृष्ठभूमि पर लाने को "करौलियंस टीम" प्रयासरत है| Karaulians आपको एक ऐसा प्लेटफॉर्म देने के लिए अग्रसर है जहां आप चाहे तो खुद भी अपने ज्ञान को लोगो तक पहुंचा सकते हैं । Karaulians पर आप अपना अकाउंट बना कर खुद अपना ब्लॉग लिख और प्रसारित कर सकते है । धन्यवाद " Founders- दे व रा ज पा ल & आ शी ष पा ल