करौली रियासत के मांची गाँव के शूरवीर

करौली रियासत के मांची गाँव के शूरवीर


मित्रो – करौली रियासत के इतिहास में मांची के यदुवंशी राजपूतों की वीरता का उल्लेख करने वाली कहावत " मांची नें साँची करी,दीनी फौज भगाय " आज भी पुराने लोगों की जुवान पर है l वर्तमान जिला मुख्यालय से 6 कि0 मी0 दूर ग्राम पंचायत मुख्यालय एवम पुराने रियासत की मांची गढ़ी वीर भूमि के रूप में जानी जाती है l


मांची एवम दीपपुरा ग्राम की जागीर हरिदास के वंशज जादौन राजपूतों के अधीन थी l यहाँ के राजपूत करौली रियासत की सेना में अपनी प्रमुख भूमिका निभाते थे l करौली के महाराजा हरबक्स पाल के समय में करौली के चारों ओर संकट के बादल मंडरा रहे थे l

1812 ई0 में नबाब मोहम्मद शाह नाम का लुटेरा उत्तर दिशा से रियासत के गांवों को लूटता हुआ करौली की ओर बढ़ रहा था l जैसे ही लुटेरे ने मांची की धरती पर कदम रखा ,वहाँ के वीरों ने चुनौती देते हुए उसके सेनिकों के साथ युद्ध शुरू कर दिया l मुहम्मदशाह को हार का सामना करना पड़ा l आखिर वह लुटेरा अपनी जान बचाकर भाग गया l

करौली के राजा ने मांची के वीर राजपूतों की बहादुरी पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए वीरों को सम्मानित किया l तभी से मांची के वीरों की रियासत में पहचान बन गई l यहाँ के राजपूतों ने भारतीय सेना एवम सुरक्षा बलों में सम्मिलित होने के बाद अदम्य साहस एवम वीरता का परिचय देकर करौली का नाम रोशन किया है l


महाराजा प्रतापपाल के राज्यारोहण के समय 1841 ई0 में हुए सत्ता संघर्ष में राजपूतों के दो समूह वन गये l मांची के ठाकुर भावी महाराजा प्रतापपाल के विरोधी थे l अंततः प्रतापपाल महाराजा वने l उन्होने मांची के जागीरदार से नाराज होकर मांची को उजडवाने के साथ गढ़ी को अग्नि के हवाले करवा दिया l उसके बाद मांची के निवासी सभी लोग वहाँ से हठकर नई वस्ती बसाकर रहने लगे l मांची के अंतिम जागीरदार भँवरसिंह थे l आज ग्राम पंचायत मांची के नाम से है किन्तु पंचायत में मांची की विखरी आबादी , विरवास ,दीपपुरा ,पहाड़ी मीरान एवम पड़ाव मक्खुसिंह की कुल ढाई हजार जनसंख्या सम्मिलित हैं l
प्रस्तुति –वेणुगोपाल शर्मा ,इतिहासकार,करौली

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