प्राचीन सपोटरा दुर्ग की वीर गाथा

प्राचीन सपोटरा दुर्ग की वीर गाथा


मित्रो – राजस्थान का वर्तमान जिला एवम पूर्व देशी रियासत करौली यदुवंशी शासकों की राजधानी रही है l रियासत की पाँच तहसीलों में जीरोता तहसील थी किन्तु तहसील मुख्यालय सपोटरा था l करौली के राजा रतनपाल के समय सपोटरा के प्राचीन दुर्ग में राव उदयपाल रहते थे l

ब्रिटिश काल में 1901ई0 में सपोटरा में प्राइमरी स्कूल एवम चिकित्सालय संचालित थे l 1905 में यहाँ पोस्ट आफिस खोला गया l यहाँ तहसीलदार का न्यायालय था जिसमें 50 रूपये तक दीवानी दावे तथा फोजदारी मामलों में 3वर्ष तक कारावास तथा 500 रूपये तक जुर्माने के अधिकार थे l पहले यहाँ के जोगी किले में बारूद बनाते थे ,जिसका निर्यात बूंदी एवम कोटा होता था l 1931 की जनगणना के अनुसार सपोटरा की आबादी 1790 थी l
रियासत काल के सपोटरा किले की पहचान प्राचीनता के साथ किले से जुड़ी वीर गाथाओं से बनी हुई है l इसका निर्माण मंडरायल किले को दिल्ली सल्तनत के अधिकार से मुक्त करने वाले अनंगपाल ने कराया था l इतिहास स्रोतों में इस निडर–वीर राजा के नाम नागार्जुन ,अर्जुन बली एवम बीजा बहादुर भी मिलते हैं l 1186 ई0 में अनंग पाल की मृत्यु के बाद मंडरायल के साथ –साथ सपोटरा किला भी निरन्तर यदुवंशियों के अधीन रहा l

1348ई0 में अर्जुन देव करौली के राजा बने l इनके बाद 11 राजाओं ने मंडरायल,उटगिरी एवम बहादुरपुर राजधानियाँ बनाईं लेकिन करौली रियासत के नाम से ही शासन किया l 1655ई0 में पहली बार धर्मपाल द्वितीय बर्तमान करौली की राजगद्दी पर आसीन हुए l धर्मपाल के बाद 1674ई0 में ज्येष्ठ पुत्र रतनपाल ने शासन संभाला l इनके शासन काल में यदुबंशी जागीरदारों ने विद्रोह करके टेक्स देना बंद कर दिया था l
राजा रतनपाल के नौ पुत्रों में उत्तराधिकारी कुँवर पाल 1688 ई0 में करौली के राजा बने l

करौली ख्यातों के अनुसार रतनपाल के दूसरे पुत्र उदयपाल सपोटरा दुर्ग में रहते थे तथा शूरवीर एवम हिम्मत वाले थे l उनकी योग्यता से प्रसन्न होकर राजा रतनपाल ने चम्बल नदी के पार 5 लाख रूपये वार्षिक आय का परगना राव उदयपाल को बक्स दिया l इस कार्यबाही पर उत्तराधिकारी राजा कुँवरपाल ने असंतोष व्यक्त करते हुए इसे रियासत एवम अन्य भाइयों के साथ पक्षपात बताया l राव उदयपाल को बड़े भाई की आपत्ति अच्छी नहीं लगी और उन्होने परगने की बक्सीस को लौटा दिया ,किन्तु उनके और बड़े भाई के वीच स्थायी द्वेष की दीवार बन गई l

एक दिन राव उदयपाल मासलपुर की ओर से भ्रमण करते हुए करौली होते हुए सपोटरा जा रहे थे l उनके दल के आगे –आगे राव का निशान और उसके पीछे नगाड़ा बजता हुआ चल रहा था l करौली के महलों में राजा कुँवर पाल ने नगाड़े की आवाज सुनकर पता लगाया l प्रमुख दरवारी ने राव साहव के बारे में राजा को बताते हुए मर्यादा के विपरीत धौंसा बजा कर आने पर आश्चर्य व्यक्त किया l राजा ने कहा कि यद्यपि ये भाई हैं ,किन्तु गुप्त बात यह है कि वर्तमान में बादशाही कमजोर पड़ने से इन भाइयों के विचार बदल गये हैं l इसी वार्तालाप के वीच राव उदयपाल ने महलों में प्रवेश किया l दौनों भाइयों में मुलाक़ात हुई और दो दिन रहकर राव साहव सपोटरा के लिए प्रस्थान कर गए l

इसी के साथ सरकारी सेना में नियुक्त दो पँवार राजपूतों ने राव के पीछे सपोटरा पहुँचकर उनसे मिले तथा राजा द्वारा नाराज होकर उन्हें निकालने की बात कही l राव साहव ने उन्हें सपोटरा ठहरने कि अनुमति देते हुए कहा कि कोई बात नहीं है जब राजा साहव बुलाएँ तब चले जाना l वास्तब में ये दौनों राजपूत राव साहव की हत्या करना चाहते थे l उनको पता था कि राजा राव से नाराज है lयदि हम राव की हत्या करके राजा के पास पहुंचेंगे तो राजा बहुत बड़ा पुरस्कार देकर लाभान्वित करेंगे l

इसी अभिप्राय से उन दुष्ट पवारों ने मौका पाकर राव उदयपाल की तालाब पर हत्या करदी l दोनों अपराधी दुष्कर्म के बाद खुश होकर राजा के पास करौली पहुंचे l अपने भाई की हत्या की सूचना मिलने पर राजा ने उन राजपूतों को गिरफ्तार करने की आज्ञा दी ,किन्तु उनको पूर्व में ही जानकारी मिलने के कारण दौनों भाग गए l
वीर राव उदयपालजी आज भी पूजे जाते हैं l राव उदयपाल के पुत्र खुशाल पाल एवम उनके पुत्र राव हमपाल के बाद बंश वृद्धि नहीं हुई ,किन्तु राव उदयपाल के अन्य भाइयों के बंशज आज भी सपोटरा में रहते हैं l
प्रस्तुति –वेणुगोपाल शर्मा ,इतिहासकार ,करौली

views: 436


DIRECTORY

Schools Colleges Coaching Centers Hospitals & Doctors Medical Stores District Administration District Police Administration Electronics Stores Mobile Shops Hotels & Restaurants Marriege Palace E- mitra Centers General Store Shoe Slippers Store Firm & Company Bank in Karauli

Karaulians

Karaulians का मुख्य उद्देश्य राजस्थान के इतिहास एवं ऐसा इतिहास जो किन्ही परिस्थितियों के कारण इतिहास के पन्नो में संकुचित सा होकर रह गया है, को डिजिटल माध्यम से जन जन तक पहुंचाने का है | राजस्थान, जो की शुरू से ही पर्यटन स्थलो से परिपूर्ण रहा है परन्तु वहाँ के कुछ छुपे हुए पर्यटन स्थल जो आकर्षक और अदभुत होने के बाद भी सैलानियों की नजरों से अभी भी दूर है, उन्हें भारत के पर्यटन स्थलों की सूची की पृष्ठभूमि पर लाने को "करौलियंस टीम" प्रयासरत है| Karaulians आपको एक ऐसा प्लेटफॉर्म देने के लिए अग्रसर है जहां आप चाहे तो खुद भी अपने ज्ञान को लोगो तक पहुंचा सकते हैं । Karaulians पर आप अपना अकाउंट बना कर खुद अपना ब्लॉग लिख और प्रसारित कर सकते है । धन्यवाद " Founders- दे व रा ज पा ल & आ शी ष पा ल