करौली का लांगरा गांव क्रांतिकारी कुंवर साहब मदन सिंह जी की डायरी से :-

करौली का लांगरा गांव क्रांतिकारी कुंवर साहब मदन सिंह जी की डायरी से :-


करौली के लांगरा गांव का 100 वर्ष पूर्व प्राकर्तिक सौंदर्य  

 आज से लगभग सौ वर्ष पूर्व करौली के गांवों का भृमण :-  करौली का लांगरा गांव क्रांतिकारी कुंवर साहब मदन सिंह जी की डायरी से :-

kunwar madan singh karauli
मैं अपने दो साथियों के साथ श्रावण शुक्ल गयारह को शहर की पूर्व की पहाड़ियों की ओर भृमण करने निकल पड़ा। नगर से चलकर दो मील की दूरी पर एक सुंदर तालाब मिला जिसका नाम रणगमा है।(इस तालाब का विवरण अलग से प्रार्थी अलग से लिखेगा)

rangawa taal

 हम इस तालाब के उत्तर भाग से निकल कर लांगरे की पर्वत मालाओ को उतरते हुए चले चारो ओर हरयाली से ढका हुआ मानो हिमायलय की किरीट धारण करने वाली  आर्य माता हरि चुनरी ओर लेट रही हो, पत्र,पुष्प,फलों से आच्छादित ओर रंगविरंगे मीठी बोलने वाले पक्षी मानो सुजला सुफला शस्य श्यामला माता की चुनरी के बेल बूटे है।

 

माता की गोद से झरना झर कर कल-कल शव्द पुकार रहे थे । ऐसी संसार शिरोमणि अन्नपूर्णा माता की गोद मे हरि दुब मखमली फर्शपर हजारो नही लाखो विविध प्रकार की गुणवत्ता पूर्ण जड़ी बूटिया लदी हुई थी। मयूरों के समहू नृत्य कर रहे थे। इस प्रकार भारत जननी के मस्तक की लटो का स्मरण करता हुआ, भद्रावती नदी पार कर पांच कोस पहाड़ी भी समाप्त कर लांगरा के प्रेमाश्रम में रात्री को पहुँचे बातचीत कर रात्री विश्राम किया दूसरे दिन उषा ने अपनी छटा दिखलाई, चिड़ियों ने घोसले छोड़कर चहचहाना प्रारम्भ किया। 
में उठा और साथियों को उठाया भ्रमचारी भीष्म को पुकारा, अधयापक सहित सभी उठ पड़े। शौच आदि से निव्र्यत हुए हृदय में प्रेमाश्रम के स्थान परिवर्तन की चिंता थी। लांगरा के रेखागिरी जी ने प्रेमाश्रम को उठाकर बालको के साथ जो उपकार किया उसको याद करते हुए चलने की ठानी। आज आकाश बादलो से घिरा हुआ था,काली घटा अपनी गर्जना सुना कर मयूरों को पुकारने को विवश कर रही थी

langra
मनमोहिनी प्रकृति की गोद मे बसा है।
सुख स्वर्ग से जहाँ है वह देश   कोनसा है।
इस गीत को गाते हुए सिंह, वघेरो या पशु पक्षियों ओर वृक्षो को सुनाते हुए आगे बढ़ रहे थे। आह कैसा सुहावना दृश्य था पहाड़ तो जल की छलनी बन रहे थे, जगह जगह पानी गिर रहा था। विविध प्रकार की  ब्यूटिया जिन्हें में जानता हूं बहुतायात में थी जैसे बहुगुणी,शरणहुली,ब्रहदंडी, सतावर,गिलोय,सफेद मूसली,असगन्ध,अपामार्ग विसरूपा आदि अन्य कई प्रकार की बूटियों का भंडार है |

करौली का लांगरा गांव इस गांव के बाद हमारी दो कोस की यात्रा के बाद अगले गांव श्यामपुर था जहाँ हमारा अगला पड़ाव था।
(अंश कुंवर साहब मदन सिंह जी यात्रा का विवरण सूक्ष्म विवरण है )


कुंवर धर्मेंद्र सिंह काचरोदा

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