महाराजा वज्रनाभ

महाराजा वज्रनाभ


महाराजा वज्रनाभ

श्री कृष्ण के गौलोक गमन के पश्चात अर्जुन उनके प्रपौत्र वज्र नाभ जी को द्वारिका से लाकर इंद्रप्रस्थ और मथुरा मंडल की गद्दी पर बैठाया जिनका राजतिलक महाराज परीक्षित के हाथो किया गया था ।

जब महाराज वज्रनाभ मथुरा के राजा बने, उस समय पूरा मथुरा उजाड़ पड़ा था। वहाँ कोई पशु-पक्षी भी नहीं रहा था। मथुरा में केवल सूने भवन थे ।

जिसके बाद महराज वज्रनाभ ने श्रीकृष्ण से सम्बंधित स्थानों पर नयी बस्तियाँ शांडिल्य मुनि की सम्मति तथा परीक्षित की सहायता से स्थापित की थीं तथा मथुरामंडल की पुन: स्थापना करके उसकी सांस्कृतिक छवि का पुनरुद्वार किया। वज्रनाभ द्वारा जहाँ अनेक मन्दिरों का निर्माण कराया गया, वहीं भगवान श्रीकृष्णचन्द्र की जन्मस्थली का भी महत्त्व स्थापित किया। मूर्ति स्थापना पौराणिक आख्यान के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण के पौत्र वज्रनाभ ने अपने पूर्वजों की पुण्यस्मृति में तथा उनके उपासना क्रम को संस्थापित करने हेतु चार देव विग्रह तथा चार देवियों की मूर्तियाँ निर्माण कर स्थापित की थीं।

महाराज वज्रनाभ जी को ही मथुरा का पुनः संस्थापक के साथ -साथ यदुकुल पुनः प्रवर्तक भी माना जाता है ।

श्रीकृष्ण के प्रपौत्र महाराज वज्रनाभ ने व्रज में आठ मूर्तियों का निर्माण किया । महाराज वज्रनाभ के पुत्र पुत्रप्रतिवाहु हुए उनके पुत्र सुबाहु हुए । महाराज वज्रनाभ ने अपने राज्य में सभी तरफ श्री कृष्ण भक्ति को प्रोत्साहित किया । इनसे ही समस्त यदुवंश का विस्तार हुआ माना जाता है। बज्रनाभ जी को ही भगवान श्री कृष्ण का प्रतिरूप माना गया है ।वज्रनाभ जी की ही बजह से ब्रज चौरासी कोस की परिक्रमा आरम्भ हुई।उन्होंने ही ब्रज में 4 प्रसिद्ध देव प्रतिमा स्थापित की।मथुरा में केशव ,वृंदावन में गोविन्ददेव ,गोवर्धन में हरि देव ,बलदेव में दाऊजी स्थापित किये थे । सही मायनों में महाराज वज्रनाभ जी को ही मथुरा का पुनः संस्थापक के साथ -साथ यदुकुल पुनः प्रवर्तक भी माना जाता है । :- Team Karaulians

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