बहादुरपुर का क़िला करौली

बहादुरपुर का क़िला करौली



करौली ज़िला मुख्यालय से 15 किलोमीटर दूर मण्डरायल मार्ग पर ससेडी गांव के पास जंगल के सुनसान वातावरण में 10किमी अंदर स्थापित बहादुरपुर का क़िला अपनी बेजोड़ राजपूती स्थापत्य कला और अपने अविस्मरणीय इतिहास को अपने अंदर समाहित किये हुए अटल खड़ा हुआ है । इसका निर्माण यदुवंशी राजा तिमनपाल के पुत्र बाधराज(नागराज)के द्वारा सन् 1090 (संवत 1148) में किया गया था । उसके बाद इस बहादुरपुर किले का विस्तार महाराजा गोपालदास (सन् 1532-1568) ने करवाया था | लेकिन यहाँ पहला राज्याभिषेक महाराजा द्वारिकादास जी का सन् 1568 (सम्वत 1626) में हुआ था ।

bahadurpur
bahadurpur

 

यह बहादुरपुर दुर्ग सन् 1568 से सन् 1651 तक करौली कहे जाने वाले क्षेत्र की राजधानी रही थी । इस दुर्ग में पहाड़ी पर एक बड़ा दरवाजा है जिसके दोनों तरफ सुरक्षा प्रहरियो के लिए स्थान हैं । अंदर एक बावड़ी बनी हुई है जिसके पास में कुँआ है । बावड़ी के पास सहेलियों की बावड़ी अलग से है । जोकि किले पर अतिक्रमण के कारण अपने अंतिम समय की और अग्रसर है इनके सामने ऊँचा बड़ा प्रवेश द्वार है जोकि करौली क्षेत्र के पत्थरों का अदभुत और कलात्मक निर्माण है । अंदर चौक के सामने चार खंभों पर दो मंजिला निर्माण है जो की नृप गोपाल भवन कहलाता है इसके साथ ही जनाना रहवास की इमारतें है ।

 

bahadurpur
bahadurpur

 

बहादुरपुर दुर्ग में 2 मंदिर भी थे जिनमे एक गोपाल जी का मंदिर था जिससे यहाँ के राजा गोपालदास जी दौलताबाद से लाए थे वह अब करौली में मदन मोहन जी के बायीं और स्थापित है । बहादुरपुर किले के अंदर आमखास का रास्ता है जिसमे बिना कोई लेंटनर् लगाए 100 चीरी जोकि 18 फ़ीट लंबी और 1फीट के आसपास मोटी है जिसे बिना क्रेन के उठाना असंभव लगता है जोकि आज भी लगी हुई है यह देखने वालो आश्चर्यचकित कर देती है ।

 

bahadurpur
bahadurpur

 

किले के निचे बरखेडे की नदी बहती है जिसके दूसरी तरफ बहादुरपुर के अन्य निर्माण भी दिखलाई देते है । आमखास के पास पंचवीर की छतरी भी है जोकि मगदराय जी बाबोसा की छतरी भी कहलाती है । जिनके बारे में कहा जाता है कि वह यहां के राजा द्वारिकदास जी के स्वर्गारोहण के बाद उनके कुछ सामंतो ने विद्रोह कर दिया था गद्दी हड़पने के लिए जिसे दबाने के लिए युद्द हुआ था । जिसमे मगदराय जी का सर काट दिया गया और धड़ बगैर सर के लड़ता हुआ आमखस के पास पहुच गया जहा पर छतरी बनी हुई है एवम् इसके अलावा यहां के ग्रामीणों से ज्ञात हुआ के यहा कभी हथियारो का कारखाना भी हुआ करता था जिसके अवशेष करौलीन्स की टीम को वहां मैदान में बिखरे पडे हुए लौह खंडो के रूप में मिले है।

 

bahadurpur
bahadurpur

 

जयपुर की राजकुमारी रसकंवर को यहाँ के राजा गोपालदास जी शादी करके लाए थे और जयपुर महाराज सवाई जय सिंह जी भी यहां तीन माह मेहमान बनकर रहे थे। इनके अलावा यहां जोधपुर के राजा जसवंत सिंह का भी ससुराल था महाराज अजीत सिंह की माँ यही की राजकुमारी थी । एवम् यहां के राजा मुकुंददास के समय की एक किवदंती बहुत प्रसिद्व है कि यह आने वाली एक बारात को विदाई का मुहर्त निकल जाने के पश्चात तीन महीनो तक अपने यहा मेहमान बना कर रखा और सेवको को आदेश दिया की रोजाना प्रयोग हुए बर्तनों को घूरे में फेंको और नये बर्तन में परोसो इस प्रकार तीन माह तक यह क्रम चला आज भी दुर्ग के पास पीतल के बर्तनों के अवशेष मिलते है । बहादुरपुर का नाम गोपालपुर व बैकुण्ठपुर भी जाना जाता है ।

 

bahadurpur
bahadurpur

 

आज यह बहादुरपुर दुर्ग सरकारी उदासीनता और असामाजिक तत्वो के कारण समय से पूर्व ही जीर्ण शीर्ण अवस्था में पहुच गया है इस किले पर जब करौलीअन्स की टीम गई थी तब वहा सूर्य पोल और सहेलियों बावड़ी पर अतिक्रमण दृष्टिगोचर हुए लोगो ने दुर्ग के अंदर खेती करना शुरु कर दिया है । अगर सरकारी महकमो ने इस करौली की ऐतिहासिक ईमारत पर ध्यान नही दिया तो यह भी कुछ समय पश्चात धूमिल हो जाएगी

 

views: 1582


DIRECTORY

Schools Colleges Coaching Centers Hospitals & Doctors Medical Stores District Administration District Police Administration Electronics Stores Mobile Shops Hotels & Restaurants Marriege Palace E- mitra Centers General Store Shoe Slippers Store Firm & Company Bank in Karauli

Karaulians

Karaulians का मुख्य उद्देश्य राजस्थान के इतिहास एवं ऐसा इतिहास जो किन्ही परिस्थितियों के कारण इतिहास के पन्नो में संकुचित सा होकर रह गया है, को डिजिटल माध्यम से जन जन तक पहुंचाने का है | राजस्थान, जो की शुरू से ही पर्यटन स्थलो से परिपूर्ण रहा है परन्तु वहाँ के कुछ छुपे हुए पर्यटन स्थल जो आकर्षक और अदभुत होने के बाद भी सैलानियों की नजरों से अभी भी दूर है, उन्हें भारत के पर्यटन स्थलों की सूची की पृष्ठभूमि पर लाने को "करौलियंस टीम" प्रयासरत है| Karaulians आपको एक ऐसा प्लेटफॉर्म देने के लिए अग्रसर है जहां आप चाहे तो खुद भी अपने ज्ञान को लोगो तक पहुंचा सकते हैं । Karaulians पर आप अपना अकाउंट बना कर खुद अपना ब्लॉग लिख और प्रसारित कर सकते है । धन्यवाद " Founders- दे व रा ज पा ल & आ शी ष पा ल