राजपूताने की देशी रियासत रही करौली में दशहरे के अवसर पर

राजपूताने की देशी रियासत रही करौली में दशहरे के अवसर पर


राजपूताने की देशी रियासत रही करौली में दशहरे के अवसर पर राजा की सबारी बड़ी शान-शौकत एवम लबाजमे के साथ निकलती थी l राजमहलों से यह सबारी वर्तमान भँवर विलास के पास रावण के खेत में पहुँचती थी l जहाँ मिट्टी के बने रावण का बध स्वयं राजा करते थे l रावण के चारों ओर कटे हुए बृक्ष,लताओं एवम टहनियों की परिधि तैयार की जाती थी जिसमें झंडियाँ लगाकर लंकापुरी का दृश्य बनाया जाता था l

सबारी के साथ पिंजरे में नीलकंठ पक्षी को लेजाया जाता था l जैसे ही शुभ घड़ी में राजा पिंजरे से नीलकंठ को निकालकर आकाश में आजाद करते थे ,उसी के साथ रावण बध की औपचारिकता पूरी की जाती थी l छोटे बच्चे बानर,भालुओं के रूप में टहनियों में लगी विजय की प्रतीक झंडीओं को लाकर अपने –अपने घरों पर लगाते थे l


आजादी के बाद इस परम्परा को आगे बढ़ाने की ज़िम्मेदारी किसी ने नहीं निभाई l लगभग दस वर्ष पूर्व उद्योगपति अजय सिंह ने त्रिलोक चंद माथुर स्टेडियम में जन भागीदारी से दशहरा पर रावण दहन करबाया ,किन्तु स्थायी व्यवस्था के अभाव में परम्परा आगे नहीं बढ सकी l

नगरपरिषद ने इस सम्बंध में अपनी ज़िम्मेदारी कभी नहीं निभाई l इसी प्रकार रियासत कालीन रामलीला की परम्परा ने भी रियासत काल मे ही दम तोड़ दिया l आज करौली की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए कोई भी ज़िम्मेदारी निभाने को तैयार नहीं है l प्रशासनिक हस्तक्षेप से ही पुरानी परम्परा का संरक्षण संभव है l

प्रस्तुति –वेणुगोपाल शर्मा ,इतिहासकार ,करौली

views: 11

QUICK ENQUIRY

ABOUT

Karaulians का मुख्य उद्देश्य राजस्थान के इतिहास एवं ऐसा इतिहास जो किन्ही परिस्थितियों के कारण इतिहास के पन्नो में संकुचित सा होकर रह गया है, को डिजिटल माध्यम से जन जन तक पहुंचाने का है | राजस्थान, जो की शुरू से ही पर्यटन स्थलो से परिपूर्ण रहा है परन्तु वहाँ के कुछ छुपे हुए पर्यटन स्थल जो आकर्षक और अदभुत होने के बाद भी सैलानियों की नजरों से अभी भी दूर है, उन्हें भारत के पर्यटन स्थलों की सूची की पृष्ठभूमि पर लाने को "करौलियंस टीम" प्रयासरत है| Karaulians आपको एक ऐसा प्लेटफॉर्म देने के लिए अग्रसर है जहां आप चाहे तो खुद भी अपने ज्ञान को लोगो तक पहुंचा सकते हैं । Karaulians पर आप अपना अकाउंट बना कर खुद अपना ब्लॉग लिख और प्रसारित कर सकते है । धन्यवाद " Founders- दे व रा ज पा ल & आ शी ष पा ल

FOLLOW US

Karaulians