इन्द्रगढ़ की बीजासन माता और करौली के देवी भक्त

इन्द्रगढ़ की बीजासन माता और करौली के देवी भक्त


मित्रो –राजस्थान के बूंदी जिले के इंद्रगढ़ कस्बे से 2 कि0मी0 दूर एक विशाल पर्वत पर बीजासन माता का मंदिर है | देवी मंदिर तक पहुँचने के लिए लगभग 700-800 सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं |


पर्वत शिखर पर होने के कारण बुजुर्ग अथवा अशक्त लोग पहाड़ के नीचे मुख्य मन्दिर तक जाने वाले पर्वतीय मार्ग के दायीं ओर बने एक छोटे मंदिर पर पूजा-अर्चना करके अपनी आस्था व्यक्त करते हैं | पहाड़ की तलहटी में ही देवी शृंगार तथा पूजा पाठ की सामाग्री की दुकानें हैं | देवी की प्राकृतिक प्रतिमा विशेष ओज लिए है l

सुखी एवम समृद्ध वैवाहिक जीवन के लिए नव विवाहित दंपति पुत्र जन्म की अभिलाषा लेकर तथा बच्चों के चूड़ाकरण संस्कार एवम अन्य मांगलिक अवसरों पर देवी दरबार में उपस्थित होते हैं l
बूंदी के राव शत्रुशाल के छोटे भाई राजा इन्द्रशाल ने 1605 ई0 में अपने नाम पर इन्द्रगढ़ कस्बे की स्थापना की थी l इतिहासकारों का मानना है कि बीजासिन देवी का स्थान उससे भी अधिक प्राचीन है l यहाँ के राजवंश से करौली का भी निकट रिस्ता है l इंदरगढ़ के अंतिम महाराजा सुमेर सिंहजी जिनके नाम से वहाँ का रेलवे स्टेशन है, वो करौली के स्वतन्त्रता सेनानी कुंवर साहब मदन सिंह जी के भांजे थे।
तंत्र, मंत्र शास्त्र की मान्यताओं के मुताबिक पर्वतीय स्थल पर स्थित दैवीय स्थानों में सिद्धियों का आह्वान करने और उन्हें जाग्रत करने का श्रेष्ठ स्थान था। पुरातन तंत्र विद्या पत्रिका 'चंडी' में बिजासन माता मंदिर को तंत्र-मंत्र का चमत्कारिक स्थान व सिद्ध पीठ माना गया है। कालांतर में इस दुर्गम स्थान तक पहुँचने में कठिनाई को देखते हुए भक्तों ने अनेक स्थानों पर बीजासन माता के मन्दिर बनबाकर सेवा पूजा करने लगे l करौली के देवी भक्त प्रति वर्ष पदयात्रा करके इन्द्रगढ़ पहुँचते हैं l


रेल से पहुँचने के लिए कोटा –दिल्ली रेल मार्ग पर इन्द्रगढ़ स्टेशन उतरना पड़ता है l बस मार्ग से सवाई माधौपुर-इन्द्रगढ़ यातायात सुविधा सुलभ है l यहा हाड़ौती के अलाबा राजस्थान के अन्य क्षेत्रों से देवी भक्त भारी संख्या में पहुँच कर मनौतिया मानते हैं l करौली के अनेक माता भक्त प्रतिमाह यहाँ दर्शन करने पहुँचते हैं l यहाँ करौली के भक्तों द्वारा निर्मित एक धर्मशाला भी है l
इन्दरगढ़ में कमलेश्वर महादेव भी लोक आस्था का केन्द्र है l इस मंदिर में शिव-पार्वती ,गणेश एवम महिसासुर मर्दिनी की प्रतिमाएँ भी प्रतिष्ठित हैं l

माता के दरबार में लंगूर भी बहुतायत में है । लोग इन्हे वीर हनुमान का अवतार मानकर इनको भोग प्रसाद भी देते है ।



प्रस्तुति –वेणुगोपाल शर्मा ,साहित्यकार ,करौली

 

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