इतिहास ए यदुवंश (महाराजा भौम पाल-महाराजा गणेश पाल)

इतिहास ए यदुवंश (महाराजा भौम पाल-महाराजा गणेश पाल)


महाराजा भौम पाल जी महाराजा भंवर पाल जी कि मृत्यु के बाद उनके छोटे भाई राव हाड़ौती भौम पाल जी गद्दी पर सन 1927 में विराजे । इनका ईश्वर में बहुत विश्वास था, यह दानवीर और सरल स्वभाव के थे । इन्होने हिंदी को करौली कि राज्य भाषा स्वीकारा । इन्होने रियासत में फैले शासकीय आतंक और बेगार जैसी कुप्रथाओ को समाप्त कर प्रजा के प्रत्येक दुःख को अपना माना और उन्हें गंभीरता ले हल किया । इन्होने बड़े अस्पताल का भी निर्माण करवाया था । पीलोदा रेलवे स्टेशन का उद्धघाटन भी इन्होने ही किया था ।

भौमपाल जी का सन 1947 में देहांत हुआ इनके एक पुत्र थे गणेश पाल जी महाराजा श्री गणेश पाल जी देव बहादुर महाराज श्री भौमपालजी का स्वर्गवास होने पर करौली राजमहलों में वैशाख वदी तेरस शनिवार संवत 2004 (सन् 1946) को इनका राजतिलक बड़ी धूम धाम से संपन्न हुआ । बचपन में ही माँ का स्वर्गवास होने के कारण इनका पालन पोषण धाय माँ के द्वारा हुआ था।

इनकी शिक्षा मेयो महाविद्यालय अजमेर में हुई थी एवम् इनको तकनिकी कार्यो का विशेष ज्ञान था। जिसके कारण करौली को पांचना बांध मिला । महाराज भौम पाल जी ने अपने शासनकाल में ही सारे प्रशासनिक अधिकार सन् 1939 में इनको दे दिए थे ।

इनकी दो शादिया हुई थी । पहली ओइला राज्य की राजकुमारी से व दूसरी खंडेला शेखावाटी ठिकाने में हुई थी। इनके दो पुत्र और जिनके नाम महाराजकुमार ब्रजेंद्र पाल जी महाराजकुमार सुरेन्द्र पाल जी थे । इनकी एक पुत्री भी थी जिनका नाम व्रजराज नंदनी देवी था इनका विवाह भावनगर गुजरात राज्य के राजा राव वीरभद्र सिंह कृष्ण कुमार सिंह जी के साथ हुआ था।

इनके बारे में कहा जाता है के यह प्रजा का दुःख दर्द जानने के लिए रात्रि में वेश बदल कर नगर भ्रमण पर जाते थे । यह एक चरित्रवान व कुशल प्रशासक के रूप में करौली के शासक रहे । इन्हें शेरो का शिकार करने व अन्य शिकार करने का शौक था । इन्हें तितर और मुर्गो की कुश्ती देखने का भी शौक था । इनके राजतिलक के समय पुरे देश में स्वतंत्रता की लहर चल रही थी जिसका प्रभाव इस रियासत में देखने को ना के बराबर मिला ।

सन् 1935 में लल्लू भड़भूजा को महात्मा गांधी की तस्वीर लगा भाषण देने पर जहाँ गिरफ्तार किया गया वही कल्याण प्रसाद को उसी मीटिंग में यह पूछने पर के "राजा किस चिड़िया का नाम है" दूसरे दिन गिरफ्तार किया गया । 14 अगस्त 1947 को दोपहर में जब यह घोषणा हुई के देश गुलामी से मुक्त हो गया है तब इन्होंने आगे बढ़कर एक भारत के लिए सबसे पहले अपनी रियासत गणतन्त्र भारत में विलय कर दी उसके बाद कभी भी इन्होंने शासन में हस्तक्षेप नही किया । एवम् रियासत के फौजियो को उनकी इच्छा से भारतीय सेना में भेज दिया जो नही गए उन्हें मदन मोहन जी व कैलादेवी में रख लिया ।

इनके दोनों पुत्रो का स्वर्गवास इनके जीवनकाल में ही हुआ था जो इनके लिए अभूतपूर्व क्षति थी जिसके कारण इन्हें काफी बडा सदमा पंहुचा था | महाराजा श्री गणेश पाल जी का स्वर्गवास 25 फरवरी 1985 को भंवर विलास महलो में ह्रदयाघात से हुई थी । गद्दी पर इनके बाद इनके पौत्र महाराजा कृष्ण चंद्र पाल जी गद्दी पर विराजे । इन्हें करौली की जनता हमेशा एक कुशल प्रशासक और करौली रियासत के अंतिम स्वतन्त्र शासक के रूप में याद करती रहेगी ।

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