इतिहास ए यदुवंश (महाराजा प्रताप पाल जी-महाराजा मदन पाल जी)

इतिहास ए यदुवंश (महाराजा प्रताप पाल जी-महाराजा मदन पाल जी)


महाराजा प्रताप पाल जी

महाराजा हरबक्स पाल जी के मरने के बाद हाड़ौती के राव अमीर पाल जी के बेटे प्रताप पाल जी गद्दी पर सन 1836 में बैठे ।

इनके समय डलहौजी की हड़प नीति के कारण भी करौली के जाने का खतरा था ।

बालूराम (कोटला रियासत से थे ) ने विक्टोरिया को पात्र लिखकर रियासती दस्ताकी अधिकारों की वकालत की ,जिसका परिणाम करौली के पक्ष में आया और कोर्ट का आदेश हुआ कि "सन 1817 में हुई संधि के अनुसार करौली राज्य अधीनस्थ ना होकर मित्र राज्य है । इसलिए इन्हे दस्तकी अधिकार तुरंत प्रभाव से दिए जाते है '' |

इनके समय में आपसी विवाद बहुत रहे थे । इन्होने नदी गेट बहार शाही कुंड का निर्माण करवाया था और सूर्य नारायण मंदिर की नींव राखी थी । इनके समय में शिकारगंज पर अंग्रेजो की छावनी भी रही थी । यह लाऔलाद गए थे ।

 

महाराजा मदन पाल

maharaj madan pal ji

प्रताप पाल जी की मौत के बाद फिर से करौली में गद्दी को लेकर आपसी विवाद हुआ जिसमे बाद में जादौन सरदारों की सर्वसम्मति से हाड़ौती के राव मदन पाल जी को दिनांक 14 मार्च 1854 को गद्दी पर बैठाया ।

इनके गद्दी पर बैठते ही शिकारगंज स्थित ब्रटिश छावनी हटा ली गई थी । यह बहादुर ,योग्य,सुलझे विचारो के साथ साथ उदार स्वभाव के थे । जनता इनसे कभी भी मिल सकती थी । इन्होने सबसे पहले अपने पूर्वजो के मंडरायल दुर्ग को मराठो से छीन लिया था ।

इनकी चचेरी बहन चंदर कँवर का विवाह कोटा महाराव शत्रुशाल सिंह द्वितीय से हुआ था ।

सन 1857 में गदर के समय बागियों ने मेजर वालटर को मार कर कोटा महाराज को नजरबन्द कर कोटा पर अधिकार करने का प्रयास किया जिसमे मुख्य बागी दीवान जालिम खां और जय दयाल थे । जिसकी खबर बाईसा ने खलीते से यहां पहुंचाई जिसमे लिखा था " महाराव को नजरबन्द कर दिया है और सत्ता हड़पने की कोसिस की जा रही है अब हमारी लाज तुम्हारे हाथ में है "|

महाराजा मदन पाल जी ने बिना समय बर्बाद किये रूपपुरा के ठाकुर मलूक पाल जी के नेतृत्व में 1000 सैनिकों की टुकड़ी यादव वाहिनी को कोटा भेजा जिसमे सरदार थे ठा. मलूक पाल (सेनापति),छीतरपाल,विशाल सिंह ,हरदेव सिंह,जयकिशन,सेवासिंह आदि थे ।

यादव वाहिनी ने भरी लड़ाई के बाद बागियों को मार कर खदेड़ दिया और शहर पर कब्ज़ा करके महाराव को मुक्त कराकर जीत का डंका बजा कर यादव वाहिनी करौली आई ।

इन्हे ब्रटिश सरकार ने G.C.S.I. का ख़िताब भी दिया था ।

इन्होने करौली में सन 1864 में हाई स्कूल की स्थापना की थी एवं सन 1858 में चिकित्सालय बनवाया था । इनके समय में मदनपालरासो काव्यग्रंथ लिखा गया था । इनके समय करौली का अभूतपूर्व विकास हुआ था । यह लाऔलाद गए थे ।

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