श्री मदन मोहन जी करौली

श्री मदन मोहन जी करौली


मदन मोहन जी का मंदिर करौली जिला मुख्यालय में स्थित मदन मोहन जी का मंदिर वैष्णव मत के प्रमुख मन्दिरो में से एक है । इस मंदिर का निर्माण महाराजा गोपाल सिंह जी ने सन् 1749  में करवाया था । महाराजा श्री गोपाल सिंह जी बहुत बडे भगवत भक्त थे । श्री मदन मोहन जी महाराज ने इन्हें स्वपन में आकर प्रेरणा दी थी के उन्हें जयपुर से लाकर करौली पधराया जाए । महाराज गोपाल सिंह जी ने कैसे मदन मोहन जी को करौली में पधराया यह एक रोमांचक कथा है । महाराज गोपाल सिंह जी ने मदन मोहन जी को करौली में पधरा कर इन्हें कुल देवता का स्थान दिया। कालांतर में यह करौली राजवंश के कुलदेवता के रूप में शुशोभित है ।

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महाराजा गोपाल सिंह ने जिस गुसाईं को सबसे पहले मंदिर का प्रभार सौंपा था, वह मुर्शिदाबाद के रामकिशोर थे। इसके बाद मदनकिशोर यहां गुसाईं रहे। करौली के मंदिर को राजघराने की ओर से अचल संपत्ति प्रदान की गई थी जिससे  18वीं सदी में 27 हजार  रुपये की सालाना आय होती थी। मदन मोहन जी मंदिर का गर्भगृह तीन खण्डों में विभक्त है। मध्य में वेदी पर कृष्ण स्वरूप में मदन मोहन जी विराजते हैं तथा उनके दांई ओर के खण्ड में राधा एवं ललिता देवी साथ−साथ हैं तथा बांई ओर वेदी पर गोपाल जी कृष्ण स्वरूप में विराजमान हैं। जिनको महाराज गोपाल दास जी दौलताबाद से लाए थे।

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इस मंदिर के निर्माण में करौली के पत्थरों का इस्तेमाल हुआ है जिसकी वास्तुकला मन को मोह कर रख देने वाली है साथ ही ये मंदिर मध्ययुगीन कला को बहुत ही बेहतर ढंग से दर्शाता है ।। मंदिर के प्रवेश द्वार से गर्भ गृह के बीच लंबा चौबारा है। गर्भ गृह में सुंदर नक्कासियां भी हैं। मंदिर के गर्भगृह के चक्करदार पथ पर चित्रों की एक बड़ी संख्या को भी देखा जा सकता है। मंदिर की वास्तुकला के सौंदर्य को गर्भगृह, चौक और यहाँ के विशाल जगमोहन में दर्शाया गया है।

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मुख्य मंदिर के अलावा मंदिर परिसर में कई और मूर्तियां स्थापित की गई हैं। चांदनी रात में मंदिर का सौंदर्य और बढ़ जाता है। कहा जाता है के श्री कृष्ण के प्रपौत्र वज्रनाभ जी ने श्री कृष्ण की तीन साकार मुर्तिया बनवाई थी जोकि क्रमशः गोविन्द देव जी ,गोपीनाथ जी और मदन मोहन जी है प्राप्त जानकारियो से यह पता चलता है कि मदन मोहन जी श्री कृष्ण के चरणरूप की साकार मूरत है ।

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यवनो के भय से इन्हें मथुरा से जयपुर स्थानांतरित किया गया था और बाद में यह गोपाल सिंह जी द्वारा करौली लाए गए थे । पंडित राजीव शर्मा द्वारा प्राप्त जानकारी की माने तो मदन मोहन जी यहां मथुरा से जयपुर जाते समय भी रुके थे । जिसके प्रताप की वजह से यहां महाराजा अर्जुन देव जी को गाय और सिंह को एक घाट पर पानी पीते हुए द्रश्य का लाभ मिला ।

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करौली जिला मुख्यालय में स्थित मदन मोहन जी का मंदिर वैष्णव मत के प्रमुख मन्दिरो में से एक है । इस मंदिर का निर्माण महाराजा गोपाल सिंह जी ने सन् 1750 में करवाया था । महाराजा श्री गोपाल सिंह जी बहुत बडे भगवत भक्त थे । श्री मदन मोहन जी महाराज ने इन्हें स्वपन में आकर प्रेरणा दी थी के उन्हें जयपुर से लेकर करौली पधराया जाए । महाराज श्री ने कैसे मदन मोहन जी को करौली में पधराया यह एक रोमांचक कथा है । महाराज श्री ने मदन मोहन जी को करौली में पधरा कर इन्हें कुल देवता का स्थान दिया। एवम् इनके साथ रुक्मणी जी/राधा जी और सत्यभामा जी/ललिता जी को भी पधराया ।

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कालांतर में यह करौली राजवंश के कुलदेवता के रूप में शुशोभित है । भगवान मदन मोहन को दिन में सात बार भोग लगाया जाता है। उन्हें मिष्टान्न काफी प्रिय है। उनके भोग में मुख्य है दोपहर को राजभोग और रात को शयनभोग। शेष पांच भोगों में से मिष्ठान आदि रहता है। इसमें मालपुआ, रसगुल्ले जैसी मिठाइयां होती हैं। खास मौकों पर मदन मोहन जी को 56 भोग लगाया जाता है। इसमे नाना प्रकार के पकवान होते हैं। इसके लिए बड़ी तैयारी की जाती है। मदनमोहन जी के सेवाकाल में सुबह पांच बजे मंगल आरती  होती है। इसके बाद सुबह नौ  बजे धूप, 11 बजे शृंगार, तीन बजे दुबारा धूप और शाम को सात बजे सांध्य आरती होती है। मंदिर सुबह 5 बजे खुलता है और रात्रि 10 बजे बंद हो जाता है। दोपहर में भी दो घंटे के लिए भी मंदिर बंद होता है।

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गोपाष्टमी , श्रीकृष्ण जन्माष्टमी और राधाअष्टमी मंदिर के प्रमुख त्योहार हैं। मंदिर के पूजा में समय के अनुशासन का पूरा पालन होता है। मदन मोहन जी मंदिर प्रांगण में हिन्दू धर्म से जुड़े अन्य मंदिर कुछ इस प्रकार है :- केशोराय जी महाराज गणेश जी और शिव परिवार जगन्नाथ जी महाराज अट्टा वाले श्री राधे इनके अलावा इस मंदिर में एक दुर्लभ सफ़ेद पीपल का भी वृक्ष है ।

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श्री मदन मोहन जी महाराज की सेवा कार्य अभी श्री मदन मोहन जी ट्रस्ट द्वारा किया जा रहा है । जिसके सोल ट्रस्टी करौली के भूतपूर्व महराज श्री कृष्ण चंद्र पाल जी है । जय श्री राधे !

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