इतिहास ए यदुवंश (बहादुरपुर )

इतिहास ए यदुवंश (बहादुरपुर )


महाराजा द्वारिकादास

maharaja dwarkadas

महाराजा गोपाल दास जी के बाद इनके पुत्र द्वारिकादास जी सन 1601 में गद्दी पर विराजे ।

इनका राजतिलक बहादुरपुर में हुआ था । इनकी गिनती मुग़ल दरबार में हिन्दू अमीरों मे की जाती थी । इनके 8 पुत्र हुए ।

प्रताप सिंह:- लाऔलाद रहे(कुंवर पदवी पर गुजरे )

मुकुंददास :- गद्दी पर बैठे ।

मगदराय :- औलाद पंचवीर जादौन ,मासलपुर मंडरायल में आबाद ।

हरिदास :- औलाद हरिदासी जादौन 16 कोटड़ी में आबाद ।

वली बहादुर :- औलाद मेवली जादौन कहलाई ।

सर्दुल:- औलाद मेवा बाबा जादौन कहलाई ।

सलैदी :- औलाद सलैदी जादौन ,मौजा बाजने में आबाद ।

केसोदास :- लाऔलाद रहे ।

 

महाराजा मुकुंददास

maharaja mukunddas

महाराजा द्वारिकादास की मृत्यु के बाद इनके दूसरे बेटे मुकुंददास गद्दी पर सन 1615 में बैठे ।

यह जहांगीर और शाहजहाँ के दरबार में मंसबदार थे । अमीरो की सूची में इनका स्थान 119 वां था ।

इनको शाहजहां ने फरवरी 1630 में दक्षिण की लड़ाई में भी साथ रखा था ।

मेवाड़ के महाराणा कर्ण सिंह से मुगलो की संधि करवाने में भी इनका योगदान था । (साभार:- जहांगीरनामा ,डॉ रघुवीर सिंह )

यह स्वभाव से धर्मभीरु थे एवं ज्योतिषी पर इनका अधिक विश्वास था ।

इनके 5 पुत्र थे ।

जगमन :- गद्दी के वारिस ।

छत्रमण :- औलाद छत्रमणी जादौन कहलाई ।

देवमन :- खोहसिमर,फतेहपुर,सैमरदा में आबाद ।

मदन पाल :- भरतुन ,धुलवास,बेरोडा,खदरपुर में आबाद ।

माहमन :- नरौली,सीगाकोड़री में आबाद ।

 

महाराजा जगमणि

maharaja jagmani

महाराजा मुकुंददास जी के बाद इनके पुत्र जगमणि गद्दी पर सन 1630 में विराजे ।

इनकी गिनती शाहजहां के हिन्दू मनसबदारो में होती थी ।

इनके समय मुक्तावतो ने बगावत की थी जिसे इन्होने शांत कर दिया ।

इन्होने करौली के विकास कार्य को आगे बढ़ाया । इनके 15 पुत्र थे ।

छत्रमणि :- गद्दी के वारिस फत्तेमन :- वंशज कोंडारिया जादौन कहलाए ।

अमरमन :- वंशज अमरगढ़ और रघुनाथपुर(गवालियर) में आबाद है ।

ओजतमन :- वंशज मौजा सवलगढ़ में आबाद ।

राजमन :- वंशज मौजा सवलगढ़ में आबाद ।

सोगमन :- लाऔलाद रहे ।

दीपमन :- लाऔलाद रहे ।

किसनमन :- लाऔलाद रहे ।

अंजमन :- लाऔलाद रहे ।

शकलगन :- लाऔलाद रहे ।

निकोलमान :- लाऔलाद रहे ।

कुशलमान :- लाऔलाद रहे ।

 

महाराजा छत्रमणि

maharaja chatramani

महाराजा जगमणि के बाद इनके पुत्र छत्रमणि जी गद्दी पर सन 1636 में विराजे ।

उत्तराधिकार के युद्द में इनका नाम ओरंगजेब के सहयोगियों में आता है ।

शाहजहां के दरबार में हिन्दू सामंतो में इनकी गिनती होती थी ।

इन्होने करौली का विकास कार्य आगे बढ़या ।

इनकी पुत्री जसकँवर की शादी मारवाड़ के राजा जसवंत सिंह जी के साथ हुई थी । जिनसे महाराजा अजीत सिंह जी का जन्म हुआ ।

इनके 10 पुत्र थे ।

पृथ्वीपाल :- कुंवर पदवी पर गुजरे ।

धर्म पाल :- गद्दी के वारिस ।

भूपाल :- औलाद इनायती में आबाद है ।

पुसतपाल :- औलाद ढुडीरामपुरा में में आबाद ।

रामपाल :- मनोहरपुरा में आबाद ।

माणकशाह :- (ख्वासवार) घुराकर में आबाद ।

हरदास :- (ख्वासवार) घुराकर में आबाद ।

 

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