इतिहास ए यदुवंश (मथुरा )

इतिहास ए यदुवंश (मथुरा )


आदि कालीन ऋषि अत्रि के वंशज सोम(चंद्र) की संतति चंद्रवंशी(सोमवंशी) कहलाए |

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 चन्द्रवंश में आगे चलकर सोम से बुद्ध -> बुद्ध से पुरुरवा -> पुरुरवा से आयु -> आयु से नहुष -> महाराज नहुष के सात पुत्र हुए |

 यति,ययाति, उत्तम, उदभव, पंचक, श्यार्ति और मेघपाल |

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 महाराज ययति का विवाह शुक्राचार्य की पुत्री देवयानी से हुआ ,जिससे यदु और तुर्वस नाम के दो पुत्र हुए | महाराज यदु ने यदुवंश की स्थापना की और इनके वंशज यदुवंशी कहलाए |

 इनमे इसी यदुवंश की 39वीं पीढ़ी में श्री कृष्ण हुए | 

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श्री कृष्ण के द्वारिका में गौलोक गमन पश्चात उनके परपौत्र व्रजनाभ जी का इंद्रप्रस्थ मे राज्याभिषेक अभिमन्यु पुत्र परीक्षित ने किया |

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बाद मे ये सुरसेन(मथुरा) के राजा हुए | राजा व्रजनाभ जी के 77वी पीढ़ी मे राजा धर्मं पाल प्रथम हुए और 85वी पीढ़ी मे मथुरा के राजा सम्वंत 872 में तुच्छ पाल जी हुए ,जिन्होंने मथुरा पर 64 वर्ष शासन किया| तुच्छ पाल जी के बाद इनके पुत्र इच्छ पाल जी मथुरा की गद्दी पर विराजे, इच्छ पाल जी के 2 पुत्र हुए जयेंद्र पाल और विनय पाल जी |

विनय पाल जी तो मोहेब गढ़ के राजा हुए(जिनसे बनाफर वंश चला जिसमे वीर आल्ह उदल हुए ) और जयेंद्र पाल जी मथुरा के |

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जयेन्द्र पाल जी मथुरा की गद्दी पर सम्वंत 1023 कार्तिक सुदी एकादशी को विराजे, इनके 11 पुत्र हुए |

विजय पाल :- गद्दी के वारिस हुए ।

रतन पाल :- औलाद परवतिया जादौ कहलाई ।

नेह पाल :- सुमेरगढ आबाद किया ।

सोन पाल :- सोनगढ़ आबाद किया ,औलाद सोनगरिया जादौ कहलाई ।

आनंद पाल :- औलाद वधारिया जादौ कहलाई ।

श्री भवन पाल :-औलाद कर्नाटकी जादौ ,भवनगढ़,देवगिरि आबाद किया ।

श्री भरत पाल :- औलाद मैसूर में आबाद , पिलोरिया जादौ कहलाई ।

श्री कच्छ पाल :- औलाद जड़िया जादौ कहलाई , कच्छ ,भुज में आबाद ।

श्री देव पाल :- लाओलाद गए ।

श्री मेन पाल :- मैनपुरी आबाद की और अपने भांजे(चौहानो) को दे दी ।

श्री मही पाल :- ................. 

सन् 995 में जयेंद्र पाल जी के बड़े बेटे विजय पाल जी का राज्याभिषेक मथुरा की गद्दी पर हुआ |

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