मंदिर श्री अंजनी माता जी


मंदिर श्री अंजनी माता जी


यह मंदिर करौली जिला मुख्यालय से हिंडौन रोड पर 4 किमी दूर पांचना नदी के किनारे 750 फीट ऊँची पहाड़ी पर स्थित है । इस मंदिर का निर्माण मंडरायल के राजा श्री अर्जुन देव जी (अर्जुनबली) ने सन 1348 में कल्याणपुरि (करौली) की स्थापना के साथ किया था एवं इन्हें कुलदेवी का दर्जा दिया था । जोकि कालान्तर में करौली राजवंश की कुलदेवी के रूप में स्थापित है ।


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इसी के पास अपनी नई राजधानी की स्थापना की थी जिसके भग्नावेश आज भी अंजनी माँ के मंदिर के पास देखने को मिलते है। जिसे बाद में किसी कारणवश वर्तमान करौली के सिंहपोल पर स्थापित किया गया था ।

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महाराज अर्जुनबली ने मंदिर की सुरक्षा के लिए यहा पास में ही विरवास नामक छावनी बनाई थी ।

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माता अन्जनी के बारे में पुराणों में लिखा है कि यह कुंजर वानरराज की बेटी थी थी और वानरराज केसरी की पत्नी थी। और इनके गर्भ से हनुमानजी का जन्म हुआ था । कुछ किवदंतियो में करौली क्षेत्र को ही वानरराज कुंजर का राज्य बताया जाता है और हनुमान जी का जन्म स्थान बताया जाता है । इस क्षेत्र में श्री कृष्ण के साथ साथ बजरंग बली के भी काफी मंदिर है ।

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वर्तमान में जो मंदिर के चारो और परकोटा देखा जाता है उसे करौली की गद्दी के पहले राजा श्री धर्म पाल जी द्वितीय के द्वारा सन् 1708 में बनवाया गया था । यहाँ मंदिर में वेसे तो सातो दिन श्रद्धालु आते पर मंगलवार और शनिवार को विशेष भीड़ रहती है । एवम् नवरात्रो में तो यहाँ लाखो भक्त आते है एवं यहाँ देव उठनी ग्यारस को विशाल मेला लगता है जिसमे आस पास के हजारो श्रद्धालु आते है ।

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यहाँ परम्परागत रूप से करौली का हरदेनिया ब्राह्मण परिवार पूजा करते आ रहे है । मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित शशिकांत हरदोनिया जी है । उनके द्वारा बताया गया है की अंजनी माता योग माया का ही एक रूप है जो अंजनी माता के नाम से पूजी जाती है ।

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यहाँ मान्यता है की देव उठनी ग्यारस के दिन माँ के दर्शन करने से असाध्य रोग भी दूर हो जाते है । कहा जाता है की भारत में माँ अंजनी का यह सबसे प्राचीन मंदिर और यहाँ स्थापित माँ अंजनी की मूर्ति भी अपने आप में इकलोती है जिसमे माँ अंजनी हनुमान जी को दुग्धपान करवा रही है ।

मंदिर के पास पांचना नदी पर स्थित अंजनी पुल भी देखने लायक है । एवं मंदिर की तलाई में स्थित पाताली हनुमान जी का मंदिर भी लोगो की श्रद्धा का केंद्र रहा है । इस मंदिर की खास बात यह है के यहाँ स्थित हनुमान जी की प्रतिमा जमीन में कितनी अंदर तक है यह किसी को नही पता है। मंदिर के पंडित जी द्वारा बताया गया था के यह मंदिर माँ अंजनी के मंदिर से भी पहले का है और यहाँ स्थित प्रतिमा नीचे पाताल लोक तक जाती है ।

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कालांतर में यहाँ भी विकास के कई कार्य हुए है और 2017 में राजस्थान सरकार ने भी यहा के विकास के लिए बजट पास किया है जिससे यहाँ भी विकास कार्य आरम्भ हो चुके है | इससे यह मंदिर प्रांगण भी विकास की और अग्रसर है ।



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Karaulians का मुख्य उद्देश्य राजस्थान के इतिहास एवं ऐसा इतिहास जो किन्ही परिस्थितियों के कारण इतिहास के पन्नो में संकुचित सा होकर रह गया है, को डिजिटल माध्यम से जन जन तक पहुंचाने का है | राजस्थान, जो की शुरू से ही पर्यटन स्थलो से परिपूर्ण रहा है परन्तु वहाँ के कुछ छुपे हुए पर्यटन स्थल जो आकर्षक और अदभुत होने के बाद भी सैलानियों की नजरों से अभी भी दूर है, उन्हें भारत के पर्यटन स्थलों की सूची की पृष्ठभूमि पर लाने को "करौलियंस टीम" प्रयासरत है| धन्यवाद "

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